Mining Reforms: उत्तराखंड को खनन सुधार कार्यों के लिए केंद्र से 100 करोड़ ₹ की प्रोत्साहन राशि मिली। इसके पूर्व राज्य को SMRI रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त होने पर इंसेंटिव के रूप में 100 करोड़ रुपये मिले थे।
- धामी के भरोसे पर खरे उतरे खनन निदेशक
- राजपाल लेघा के प्रयासों पर केंद्र की मुहर
उत्तराखंड ने खनन क्षेत्र में सुधारों से राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत और विश्वसनीय पहचान बनाई है। इस कड़ी में पारदर्शिता, मॉनिटरिंग और समयबद्ध सुधारों की वजह से ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली है। इसके पहले FY 2024-25 के दौरान खनन से 1040.57 करोड़ रिकॉर्ड राजस्व अर्जित करके राज्य में नई इबारत लिखी।
केंद्रीय ख़ान मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 की विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत उत्तराखंड को माइनर मिनरल्स रिफॉर्म्स के तहत 100 करोड़ ₹ की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी है। इसके पूर्व अक्टूबर 2025 में राज्य को SMRI रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त होने पर इंसेंटिव के रूप में 100 करोड़ रुपये की राशि मिली थी। जिसे मिलाकर राज्य को बेहतर नीतियों की बदौलत कुल 200 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है। (Mining Reforms)
दरअसल, धामी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में राजपाल लेघा के उत्तराखंड खनन निदेशालय की कमान संभालने के बाद खनन सुधार और बेहतर नीतियां प्राथमिकता से लागू की गईं। जिसका परिणाम यह है कि खनन सेक्टर में देश में टॉप पायदान पर पहुंचने में कामयाब रहा। ‘माइनर मिनरल रिफॉर्म्स’ से संबंधित 7 में से 6 प्रमुख सुधारों के मानको को पूरा करते हुए राज्य ने प्रथम स्थान प्राप्त किया गया है। केंद्रीय ज्ञापन में शामिल राज्यों नागालैंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में उत्तराखंड का प्रदर्शन सबसे बेहतर दर्ज किया।

निदेशक राजपाल लेघा के मुताबिक राज्य स्तर पर खनन में पारदर्शिता, इफेक्टिव मॉनिटररिंग और समयबद्ध सुधारों की दिशा में ठोस कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार के प्रोत्साहन राशि से उत्तराखंड के प्रयासों पर मुहर लगी है। बकौल लेघा उत्तरप्रदेश, हिमाचल ,जम्मू कश्मीर आदि राज्य भी उत्तराखंड की खनन नीतियों का अनुसरण कर रहे हैं।
लेघा का दावा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में खनन विभाग में सुधार (Mining Reforms), सुदृढ़ प्रबंधन और नीतियों से सरकारी खजाने को मजबूती मिली है। ऐसा अवैध खनन, भंडारण और परिवहन पर पर प्रभावी नियंत्रण एवं गतिमान कार्रवाई के चलते सम्भव हुआ है। ई निविदा और ई नीलामी के माध्यम से खनन पट्टों का आबंटन सुनिश्चित किया गया।खनन गतिविधियों के चलते राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है।

खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खनन विभाग में सुधार Mining Reforms कार्यों से बढ़े राजस्व को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान पर पीठ थपथपाई है। उनका कहना है कि प्रदेश में खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ई नीलामी प्रणाली, सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसे कई कदम उठाए गए हैं। सरकार पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, अवैध खनन पर लगाम कस रही है। जिसके सकारात्मक परिणाम नजर आने लगे हैं।
आपको बता दें कि खनन विभाग ने 2024-25 के दौरान रिकॉर्ड 1040.57 करोड़ ₹ का राजस्व अर्जित किया है।
इतना नहीं, मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान सर्वाधिक 74.22 करोड़ रुपये से ज्यादा की पेनल्टी भी वसूल की गई है।
राजपाल लेघा के खनन निदेशालय की कमान संभालने के बाद पहली बार निर्धारित लक्ष्य 875 करोड़ से 165.57 करोड़ रुपया अधिक राजस्व मिला। (Mining Reforms)
गौरतलब है कि राज्य गठन से ही खनन लगातार सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच एक दूसरे आरोप प्रत्यारोप का मुद्दा रहा।
लेकिन इसके इतर विभाग ने राजस्व के मद्देनजर एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान साल 2017 से 2021 के दौरान करीब 1757.87 करोड़ का राजस्व अर्जित हुआ था।

इस कड़ी में मौजूदा धामी सरकार के कार्यकाल के दौरान अभी तक 2732.72 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्म हुआ।
वर्ष वित्तीय लक्ष्य राजस्व प्राप्ति (₹करोड़)
2016-17 500 335.27
2017-18 620 440.13
2018-19 750 414.59
2019-20 750 396.91
2020-21 750 506.24
2021-22 750 575.01
2022-23 825 472.32
2023-24 875 645.46
2024-25 875 1040.57
इतना नहीं, मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान अभी तक 74.22 करोड़ रुपये की पेनल्टी वसूल की गई। वहीं, धामी सरकार के कार्यकाल में अभी तक 124.1 करोड़ रुपए से ज्यादा वसूले जा चुके हैं। जो कि राज्य गठन के बाद अवैध खनन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के जरिए सर्वाधिक है। ये वो आंकड़े हैं जो पारदर्शिता, मॉनिटरिंग और समयबद्ध सुधारों (Mining Reforms) के जमीन उतरने की गवाही दे रहे हैं। जिसके चलते केंद्र सरकार राज्य को ₹200 करोड़ की प्रोत्साहन दे चुका है।