Cabinet Expansion: उत्तराखंड में पांच नए मंत्रियों ने ली शपथ, धामी कैबिनेट फुल. राज्य में ‘नेतृत्व परिवर्तन’ की अटकलों पर ब्रेक के संकेत.मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए पहाड़-मैदान और दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश.
By Rahul Singh Shekhawat
आखिरकार उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार हो ही गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पांच विधायकों को अपनी कैबिनेट में शामिल किया है। जिनमें मदन कौशिक, खजान दास, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा और भरत चौधरी शामिल हैं। पुष्कर ने चुनावी साल में उत्तराखंड में पहाड़ और मैदान की राजनीति में संतुलन की कोशिश करते दिखाई दिए हैं।
इस कड़ी में कुमायूं-गढ़वाल, ठाकुर, ब्राह्मण, पंजाबी और अनुसूचित जाति को तरजीह देकर सामाजिक संतुलन ध्यान में रखा गया। हालांकि, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी और बागेश्वर जिले से अब भी कोई मंत्री नहीं बना। जो मंत्रिमंडल के तयशुदा साइज के चलते मुमकिन नहीं है। अलबत्ता हाईकमान से मंत्रिमंडल पूरा करने की की हरी झंडी ‘नेतृत्व परिवर्तन’ की अटकलों पर विराम लगने के साफ संकेत हैं।
Cabinet Expansion: मैदानी चुनावी गणित साधने की कोशिश!
सूबे में सबसे ज्यादा 11 सीटों वाले मैदानी हरिद्वार जिले से मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा मंत्री बनाए गए हैं। कौशिक खंडूरी, निशंक, त्रिवेंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। साथ ही 2022 के चुनाव जीतने के समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। लेकिन बदली परिस्थितियों में वह न सिर्फ पद से हटे बल्कि मंत्री पद से महरूम रहे। मौजूदा सरकार में हरिद्वार जिले का शून्य प्रतिनिधित्व था। कमोबेश एक साल पहले प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद मैदानी मूल का एक भी मंत्री सरकार में नही था।

गौरतलब है कि कांग्रेस ने पिछले आम चुनाव में हरिद्वार में पांच सीटें जीतकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया था। धामी ने 2027 के चुनावों के मद्देनजर मैदान को साधने के लिए जिले के दो विधायकों को मंत्री बनाया। उन्होंने अटकलों से इतर अनुभवी मदन कौशिक को तरजीह दी। वहीं देहरादून, उधमसिंहनगर और हरिद्वार में पंजाबी वोटरों की अच्छी खासी तादाद को देखते हुए इस वर्ग के बत्रा को अपनी कैबिनेट में जगह दी है। जिसके पीछे कांग्रेस को मैदानी इलाकों में डेंट करने रणनीति नजर आ रही है।
Cabinet Expansion : दलित वोटों में सेंधमारी रोकने का इंतजाम!
देहरादून में एक आरक्षित सीट से विधायक खजान दास को कैबिनेट में जगह मिली। अनुसूचित जाति के दास पूर्ववर्ती निशंक सरकार में मंत्री रह चुके हैं। जबकि रेखा आर्य पहले ही अल्मोड़ा जिले से मंत्री हैं। दरअसल, कांग्रेस का दलित, OBC और ‘संविधान बचाओ अभियान’ पर फोकस है। पुष्कर सिंह धामी ने कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलो से एक पुरूष – एक महिला दलित मंत्री बना दलित वोटों में सेंधमारी रोकने की तैयारी की है।

Cabinet Expansion: तो अब बीजेपी में टीम धामी हो रही तैयार!
नैनीताल जिले में भीमताल के युवा विधायक राम सिंह कैड़ा कैबिनेट मंत्री बने हैं। वह छात्रसंघ और ब्लॉक राजनीति से गुजरते हुए इस मुकाम पर पहुंचे हैं। कैड़ा कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर 2017 में निर्दलीय लड़कर निर्वाचित हुए थे। फिर 2022 के आम चुनाव से ऐन पहले भाजपा में शामिल होकर दूसरी बार लगातार विधायक बने। वह सीएम धामी के भरोसेमंद है।

रुड़की में चेयरमैन रहे प्रदीप बत्रा 2012 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार एमएलए बने थे। वह हरीश रावत सरकार गिराने वाले अन्य साथियों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। जिसके बाद 2017- 2022 में विधायक निर्वाचित हुए। पंजाबी और व्यवसायी पृष्ठभूमि के प्रदीप किसी एक गुट से जुड़े नहीं देखे जाते। लिहाजा धामी के लिए उन पर भरोसा करना नुकसान का सौदा नहीं है। उम्र के लिहाज से देखें कैड़ा और बत्रा 50 – 55 साल के अंदर हैं। भरत चौधरी भी पहली बार मंत्री बनाए गए हैं। जिससे साफ है कि बीजेपी में टीम धामी तैयार हो रही है। इसके पहले नगर निगम और जिला पंचायत चुनाव भी इसके गवाह रहे।
हालात से उपजा विकल्प ‘स्थायी नेतृत्व’ में तब्दील!
हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी को 2022 के चुनाव चंद महीने पहले मुश्किल हालात में तीरथ सिंह रावत की जगह एक ‘नाईट बैट्समैन’ के तौर पर पिच पर उतरे। भाजपा के अंदर ही उन्हें एक अस्थायी व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा था। इस कड़ी में धामी खुद अपना चुनाव हार गए लेकिन पार्टी मजबूत बहुमत के साथ जीत गई। लेकिन मोदी – शाह ने हर बार ‘सत्ता बदली’ का मिथक तोड़ने वाले धामी पर ही भरोसा जताया। जिसके बाद ताबड़तोड़ बैटिंग करते हुए समान नागरिक संहिता, धर्मान्तरण कानून और मजार ध्वस्तीकरण सरीखे वैचारिक शॉट्स लगाए।

लेकिन पेपर लीक और अंकिता भंडारी हत्याकांड सरीखे मुद्दों पर न सिर्फ विपक्ष बल्कि खुद भाजपा के एक धड़े ने घेराबंदी की। लेकिन धामी ने सीबीआई जांच के आदेश देकर चक्रव्यूह से निकलने में सफलता पाई। वह खनन और कानून एवं व्यवस्था समेत कतिपय कुछेक मुद्दों पर अपनी पार्टी के सांसद के निशाने पर रहे। लेकिन धामी ने खामोश रहकर चतुराई के साथ चक्रव्यूह भेदने में सफलता पाई।
भाजपा हाईकमान से मिली हरी झंडी के बाद ही पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। जिससे गाहे बगाहे ‘नेतृत्व परिवर्तन’ की अटकलों पर विराम लगने के साफ संकेत नजर आ रहे हैं।
सरकार भाजपा की, कैबिनेट में कांग्रेस का दबदबा!
कहने की जरूरत नहीं है कि मौजूदा विस्तार के बाद पहली बार पूरी कैबिनेट पूरी हुई है। सीएम धामी के अलावा 11 मंत्रियों में सिर्फ धन सिंह रावत, मदन कौशिक, खजान दास और गणेश जोशी ही भाजपा मूल और बाकी 7 मंत्री कांग्रेस पृष्ठभूमि के हैं। वह चाहे सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा, रेखा आर्य हो या फिर राम सिंह कैड़ा और भरत चौधरी।
हालांकि यह सिर्फ उत्तराखंड की बात नहीं है। दूसरे दलों से आए बड़ी संख्या में नेता राष्ट्रीय स्तर या फिर अन्य राज्यों में मुख्यमंत्री और मंत्री पदों पर हैं। दरअसल, यह मोदी- शाह युग में भाजपा का जनाधार बढ़ा मजबूत और विस्तार करने की रणनीति का हिस्सा है। लेकिन इन हालात भाजपा का कोर कैडर बेचैन और असहज जरूर है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)