जान की खैर हो! जाने-अनजाने मीडिया ‘कोरोना’ का डर तो नहीं फैला रहा?

Dr Sushil Upadhyay कुछ साल पहले की बात है। बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला को कैंसर हो गया था। जब उनका इलाज शुरू हुआ तो उनके डॉक्टर ने एक महत्वपूर्ण बात कही कि जब तक इलाज चलेगा तब तक आप कैंसर के बारे में सोशल मीडिया अथवा किसी भी मीडिया पर कोई सामग्री नहीं पढ़ेंगी। डॉक्टर … Read more

Society: कहीं कोरोना के खौफ ने खून और जज्बाती रिश्तों के बहम को बेपर्दा तो नहीं कर दिया!

Rahul Singh shekhawat मुझे अपने चैतन्य काल में याद नहीं है कि कभी हवा इतनी साफ रही होगी। जीवनदायिनी नदियों में अब पानी इतना साफ है कि करोड़ों की रकम ठिकाने लगाने के बाद भी वो शायद ही सपने में दिखा हो। पिछले एक पखवाड़े में सड़कें इस कदर खाली हैं कि किसी एक्सीडेंट की नौबत ही … Read more

World: ट्रम्प सिरफिरा है! फिर भी हम अभिभूत हो जाते हैं

Narayan Bareth वो सिरफिरा है, मगर जब भी वो कशीदे पड़ता है, हम अभिभूत हो जाते हैैं। जब वो कुछ अनचाहा बोल देता है ,नस्ले उदास हो जाती हैैं। डोनाल्ड ट्रम्प तुम्हे बधाई हो! जिस मुल्क में उसके 47 फीसद लोग अपने राष्ट्रपति को जेहनी तौर पर अस्थिर बता रहे हो, उसे लेकर भारत में … Read more

Martyrdom: बता कोरोना तूने ‘शहीद’ हुए जवानों के साथ मजाक क्यूं किया?

Rahul Singh Shekhawat शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा जबकि कोई भारत का लाल सरहद पर शहीद हुआ हो और उसकी विदाई में सड़कों पर जनसैलाब ना उमड़ा हो। कम से कम मुझे अपने चैतन्यकाल में तो याद नहीं आता कि कभी ऐसा हुआ। अभी सेना के 5 जवान जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से … Read more

We the Indian: तो अब ज्यादा ‘उत्सवधर्मी’ हो गए हैं….. हम भारत के लोग!

By Rahul Singh Shekhawat सुना है सदाबहार फ़िल्म अभिनेता देव आनंद साहेब कहते थे कि मेरी मौत कोई रोयेगा नहीं और ना ही कोई आंसू बहाएगा। लगता है आज कोरोना ने उनकी आखिरी ख्वाहिश जरूर पूरी कर ही दी होगी। मैं दावा नहीं कर सकता कि मरने वालों के परिजन मातम में आतिशबाजी और पटाखों … Read more

कोरोना को हराने के लिए धार्मिक बहस की बजाय मुस्लिम धर्मगुरुओं की मदद ली जाए

Rahul Singh Shekhawat मध्यप्रदेश के इंदौर की गलियों में कोरोना के मद्देनजर स्क्रीनिंग करने गई डॉक्टरों की टीम पर पथराव हुआ। उत्तराखंड के नैनीताल में भी कोरोन्टाइन हुए लोगों ने डॉक्टरों के साथ अभद्रता की। इसी तरह बेंगलुरु में आशा वर्करों का विरोध किया गया। उधर, बिहार के मधुबनी और मुंगेर में पुलिस टीम का … Read more

Tablighi Jamat: कोरोना से लड़ाई के लिए ‘मजहबी बहस’ से बचने की जरूरत है

Rahul Singh Shekhawat बेशक जहालती हरकत की वजह से तबलीगी मरकज के जमातियों ने ना सिर्फ अपनी बल्कि संपर्क में आने वालों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया। जिसमें शरीक हुए लोगों में संक्रमण की तादाद ने लॉकडाउन की भावना पर एक हद तक पानी फेर दिया है। जिसके लिए जिम्मेदारी, जवाबदेही और कार्रवाई … Read more

कोरोना: दिल्ली की सड़कों पर उमड़ा बदहवासी का सैलाब! ‘लॉकडाउन’ के बहाने बंटवारे की तस्वीरें याद आईं, क्यों जमीन अनुमान लगाने में फेल हुई नौकरशाही?

Pramod Sah हमने बंटवारा तो नहीं देखा लेकिन उसके किस्से जरूर सुने। दिल्ली में आनंद विहार बस अड्डे की कुछ तस्वीरें और सड़कों पर उमड़े काफिले को देखकर बरबस बंटवारे की दर्द भरी कहानी मन मस्तिष्क में उभरने लगी। उस वक्त के व्यवस्थापक नौकरशाहों के प्रति मन में बहुत सम्मान जाग गया। तब एक तरफ … Read more

कहीं असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को कोरोना से पहले ‘भूख’ से ना जूझना पड़ जाए! महामारी के दौर में संगठित औऱ असंगठित का भेद सही नहीं है

Rahul Singh Shekhawat प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में लॉक डाउन लागू कर दिया है। सड़क, रेल और हवाई समेत अन्य सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट 21 दिनों के लिए बंद है। अलबत्ता, जीवन से जुड़ी दवाई और रोजमर्रा की जरूरत की सेवाओं पर पाबंदी नहीं है। देश व्यापी तालाबंदी … Read more

उत्तराखंड: बातों के सिवाय 3 सालों में हुआ ही क्या ? त्रिवेंद्र के नेतृत्व में भाजपा सरकार के 3 साल हुए पूरे

Yogesh Bhatt गैरसैण को बिना किसी प्लान ग्रीष्मकालीन राजधानी किया घोषित क्या हुआ हर अस्पताल में डाक्टर पहुंचाने की बातों का कहां है इन्वेस्टर्स समिट में हुए सवा लाख करोड़ का निवेश कहां है वो गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने वाली कंडी रोड विकास के तीन साल : ‘बातें कम और काम ज्यादा’ यह स्लोगन … Read more