पत्रलेखन ‘नए-भारत’ में कला है या फिर बला !
By सुशील राय पत्राचार में पत्र और आचार सब हो गये तार-तार, फिर भी जय बोलो माननीय की जय बोलो सरकार! संवैधानिक पदों पर बैठे माननीयों के बीच ‘पत्राचार’ देखकर तो यही लगता है कि ये ‘पत्र’ नहीं बल्कि कोई तीर थे। जो एक-दूसरे को गहरी चुभन देने के लिए तेजी से आगे निकल गये। … Read more